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рд╕рдоाрдЪाрд░ рдкрдд्рд░ рдЬुрд▓ाрдИ, реирежрезрен

рд╕рднी  рдкाрдардХों рдХे рд▓िрдП рд╣рдоाрд░ा рдк्рд░рдердо рд╕ंрд╕्рдХрд░рдг   рдЬुрд▓ाрдИ , 2017


आज अनपढ़ तो छोड़िए! कुछ पढ़े-लिखे लोग भी "ज्योतिष विद्या" का मजाक उड़ाते हैं जोकि भारतीय ऋषि-मुनियों की देन है! साथ ही ज्योतिष विद्या का कुछ लोगों द्वारा मजाक उड़ाना भी स्वभाविक है क्योंकि कुछ चंद ज्योतिषी लोग ज्योतिष विद्या के दायरे में नहीं रहते हैं| मैं, अल्पज्ञ इसीलिए कहता हूँ कि👉"ज्योतिषी गलत हो सकता है लेकिन ज्योतिष गलत नहीं!" वर्तमान में इन्हीं ज्योतिषीय ग्रंथों  में आगामी "ग्रहण" इत्यादि जैसी अनेकों गणना देश-विदेश व समय सीमाओं सहित पहले से ही लिखित हैं जो आज भी सूर्य या चन्द्र ग्रहणों के समय सत्य साबित होती हैं|

कोरोना के संदर्भ में, मैंने ज्योतिषीय गणना पर विचार व विवेचन करके पहले भी दो लिखित लेखों में "पहला👉14 अप्रैल से सूर्यदेव उच्चराशि मेष में आते ही कोरोना का करने लगेंगे ख़ात्मा" और "दूसरा लेख👉 कोरोना का डेथवॉरेंट जारी 14 अप्रैल से 14 मई तक कोरोना को कभी भी लग सकती है फाँसी" वेबसाइट

 www.paraspunj.com पर प्रकाशित कर चुका हूँ लेकिन अब देश का देसी आँकड़ा कहता है कि अंक 3 से अंक 5 तक आते-आते कोरोना की तेरहवीं हो सकती है और इसी अवधि में मेरे भारत को कोरोना के समूल नाश के लिए आरोग्य प्रदाता सूर्यदेव औषधि भी प्रदान कर सकते हैं! देश को जरुरत है तो सिर्फ़ जनता के धैैर्य और संयम रूपी सहयोग की |

 👉लॉकडाउन विवरण -ऐलान(!)2+4+3+2+2=13(1+3)=अंक 4

ऐलान(!!)1+4+4+2+2=13(1+3) =अंक 4

लॉकडाउन अवधि👉 3-5-2020 तक यानी 3+5+2+2=12(1+2)=अंक 3 और मैंने अपने पूर्व लिखित लेख👉"कोरोना डेथवॉरेंट जारी" में ज्योतिषीय गणना में सूर्यदेव पर आधारित होकर तारीख़ 14 अप्रैल 2020 से 14 मई 2020 लिखी है जोकि संक्षिप्त में देसी अाँकडों के अनुसार-

1+4+4+2+2=13(1+3)= अंक 4

1+4+5+2+2=14(1+4)= अंक 5 है

वैश्विक कोरोना महामारी का निष्कर्ष निकालें तो कोरोना के आतंकी अंत के लिए अंक 3,4 और अंक 5 का अाँकडा महत्वपूर्ण है अर्थात कोरोना की वाल्यावस्था 2019=3, कुमार+युवास्था 2020=4 वृद्धावस्था 2021=5 और उसके बाद मृतावस्था तो निश्चित होती ही है|

आज महाभारत से भी बड़े इस विश्वव्यापी महामारी रूपी विश्वयुद्घ में हमें मिल-जुल कर सरकार को "दिमाग से ज्यादा दिल से" सहयोग करना चाहिए जिसके चलते मेरे भरत जी का भारत पुन: विश्वगुरु बन सके|

👉"ज्योतिष तो सिर्फ़ चिंगारी है जनाब! ज्योति तो स्वयं जलानी होगी!"

देश की जनता से मैं अल्पज्ञ करबद्ध निवेदन करता हूँ कि सरकार के निर्देशों का दृढ़ता से पालन करें और 👉"राष्ट्रधर्म" सर्वोपरि धर्म के नियमों को ईमानदारी से निभाऐं| लेख में त्रुटि के लिए क्षमायाचना करता हूँ!👉पी.एम.जैन"ज्योतिष विचारक" दिल्ली मो.9718544977




नई दिल्ली- विश्व में कोरोना जैसी अनेकों बीमारियाँ आती रही हैं और समयानुसार उनका निदान भी हुआ है लेकिन इंसान से इंसान में फैलने वाली कोरोना महामारी तब तक ही पैर पसार रही है जब तक इंसान द्वारा ही रामबाण औषधि का निर्माण नहीं हो पा रहा है| आयुर्वेद कहता है कि दवा से पहले परहेज महत्वपूर्ण होता है अगर आज हम परहेज के साथ अपनी जीवन यात्रा करेंगे तो बीमार होने की संभावना बहुत ही कम उत्पन्न होगी लेकिन कहते हैं कि "सोते हुए को जगाना आसान है किन्तु जागते हुए को जगाना कठिन कार्य है!" संसार में यह कहावत सदियों से प्रचलित है| कोरोना के दौरान भारत सरकार भी जनता को जगाते हुए जनहित में जारी निर्देशों का दृढ़ता और धैर्य के साथ पालन करने की बार-बार अपील कर रही है! लेकिन कुछ भारतीयों के सरकार द्वारा निर्देशित निर्देशों का पालन करने में विलम्ब करना जनहित, राष्ट्रहित और राष्ट्रधर्म को नहीं दर्शाता है जोकि दुखद है| 

ज्योतिष शास्त्र भी कहता है कि ग्रहचक्र की चाल के अनुसार ही समयचक्र में परिवर्तन आता है|

आज कई सदियों और दशकों उपराँत वह समय आ चुका है जिसके अन्तर्गत हमें अपनी दिनचर्या और जीवन शैली में परिवर्तन करना ही पडे़गा और भारतीय ऋषि-मुनियों की प्राचीनतम पद्धति को पुन: अपनाना होगा|

आधुनिकयुग की अधिक चकाचौंध से परहेज करना होगा! शादी-विवाह, अधिक भीड़भाड़ वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट और धार्मिक या अन्य कार्यक्रमों से बचना होगा! रहन-सहन व खान-पान में शुद्धता के साथ खाद्य वस्तुओं को मौसम के अनुसार समय मर्यादा(अवधि) तक प्रयोग करना चाहिए और दिन-रात की समय सीमा पर भी विशेष ध्यान केन्द्रित करना होगा| 

👉खाद्य पदार्थ के अन्तर्गत भक्ष्य,अभक्ष्य सम्बन्धित जानकारी पदार्थ की समय सीमा(मर्यादा) सहित जैन धर्म के ग्रंथों में सदियों से वर्णित है जिसे समस्त विश्व के नागरिकों को अपनाना हितकारी सिद्ध होगा|

लॉकडाउन के दौरान कोरोना के संकटकाल में हमें वही प्राचीन भारतीय ऋषि-मुनियों की पद्धति, जिसमें सूर्योदय से पूर्व उठना, माता-पिता, गुरू और अपने से ज्येष्ठ आदि को नमन करना, समय पर नित्यकर्म(शौच, दन्त मंजन, स्नान आदि) करके प्रभु स्मरण करना खाने-पीने से पूर्व पुन: हाथ-पैरों को अच्छी तरह धोकर, जमीन या लकड़ी के पट्टा पर बैठकर सुखासन में शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण करना आदि शामिल हैं| ध्यान रखना👉 कुछ दशकों पूर्व लगभग समस्त मानवजाति जब अपने काम से वापिस अपने घर में प्रवेश करती थी तब सर्वप्रथम अपने हाथ-पैर-मुँह धोकर और कुल्ला करके ही अपने परिजनों से मिलती-जुलती थी लेकिन वर्तमान में कुछ अति अधुनिकतावादी लोग जूते-चप्पलों को रसोई घर में घसीट रहे हैं! सार्वजनिक जगहों पर थूक रहे हैं! भोजन और मूत्र विसर्जन के लिए जानवरों की पद्धति अपना रहे हैं| संक्षिप्त में कहूँ तो आज मानवजाति को उठना-बैठना, सोना इत्यादि के साथ-साथ व्यवहारिक धर्म में हाथ जोड़कर प्रणाम करने आदि की सही आदत डालना ही लॉकडाउन की सफलता के साथ-साथ आगामी निरोगी और सुखद जीवन के लिए सुखद परिणाम के संकेत हैं|  

प्राकृतिक आपदा हो या कोरोना जैसी महामारी, हमें चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए बल्कि अपनी सूझबूझ(विवेकता) से उसका मुकाबला करने हेतु निदान खोजना चाहिए और पुन: संकटकाल उत्पन्न न हो इसके लिए सरकार सहित समस्त जनता को रणनीति बनानी चाहिए| गलती हम करें और दोष प्रकृति(भगवान) को दें यह उचित नहीं है|

👉आज इंटरनेट की दुनिया में मुझे लगता है कि "अभिमन्यु की भाँति आज का नवजात शिशु भी अपनी गर्भावस्था में ही मोबाईल चलाना सीख लेता है!" वर्तमान में शिशुओं और नवयुवक पीढ़ी को मोबाईल व टी.वी आदि पर उटपटांग वीडियो गेम और उटपटांग टी.वी सीरियल की जरूरत नहीं है बल्कि शारीरिक तौर पर खेले जाने वाले गेम ,योगा और संस्कारित करने वाले टी.वी सीरियल, नैतिकशिक्षा, स्वच्छता अभियान इत्यादि की विशेष आवश्यकता है! 

👉देश सहित विदेशी सरकारों से मैं अपील करता हूँ कि प्रकृति

(पर्यावरण) के साथ-साथ जीवमात्र के निरोगी जीवन हेतु देश दुनिया में 1 माह में कुछ समय की अवधि तक अधिक प्रदूषण फैलाने वाले कारखानों और अनावश्यक वाहनों को बंद रखने पर विचार करना चाहिए क्योंकि प्रकृति की रोग प्रतिरोधक क्षमता(इम्युनिटी) बढे़गी तो पृथ्वी पर भी समस्त जीवमात्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वत: ही पैदा होगी|

👉आज कोरोना वैश्विक महामारी के इस संकटकालीन दौर में नवग्रह श्रृंखला के तहत ज्योतिष शास्त्र में न्यायाधीश, दण्ड़ाधिकारी की पदवी से विभूषित शनिग्रह को कुछ महत्व दे रहा हूँ 👉24 जनवरी 2020 से शनि ग्रह आगामी ढ़ाईवर्ष तक वक्री-मार्गी होते हुए "पृथ्वीतत्व" स्वराशि मकर में ही भ्रमणशील रहेंगे जिसके चलते👉"जाग जाओ" और "दाल रोटी खाओ और प्रभु के गुण गाओ" ही नहीं बल्कि उनके गुणों को अपने जीवन काल में अपनाओ भी क्योंकि इधर राहू 23 सितम्बर 2020 को संसारिक सुख-साधन देने वाले शुक्रग्रह की स्वराशि वृषभ में डेढ़ वर्ष के लिए और उधर केतु, भूमि स्वामी मंगल ग्रह की राशि वृश्चिक में डेढ़ वर्ष के लिए भम्रणशील रहेंगे जोकि किसी प्राकृतिक आपदा को न्यौता दे सकते हैं| इसीलिए देश दुनिया की मानवजाति को अहंकार इत्यादि जैसी अनेकों अनैतिक विकृतियों का त्याग करते हुए महान से महान भारतीय ऋषि-मुनियों और भगवंतों जैसी महानात्माओं के अतिरिक्त वर्तमान के महापुरूषों द्वारा निर्धारित जीवनचर्या- दिनचर्या का अनुसरण करना ही चाहिए साथ ही साथ प्रकृति हो या अन्य जीवमात्र हो उनके प्रति भी "भगवान महावीर स्वामी द्वारा जनहित में दिया गया "जीओ और जीने दो" का संदेश नि:संकोच अपनाना चाहिए|"👉21 वीं सदी के वात्सल्यमूर्ति जैनाचार्य 108 श्री ज्ञानभूषण जी महाराज"रत्नाकर" 

संकलन👉 वाणी प्रखर क्षुल्लिका 105 श्री ज्ञानगंगा माता जी


नई दिल्ली- भारतीय जनता-जनार्दन को सर्वप्रथम मैं प्रणाम करते हुए कहना चाहता हूँ कि कोरोना पर सरकारी निर्णय के अतिरिक्त ज्योतिषीय गणना के आधार पर भी "कोरोना वायरस" का डेथवॉरेंट जारी हो चुका है जानिए👉क्यों? क्योंकि14 अप्रैल से "रोग्य प्रदाता सूर्यदेव"का उच्चराशि मेष में उदित होना दर्शाता है कि अब कोरोना के समूल नाश का समय आरम्भ हो चुका है|

मैंने अपने पूर्व लिखित लेख में कोरोना वायरस के संदर्भ में आंशिक तौर पर ज्योतिषीय उल्लेख👉 www.paraspunj.com वेबसाइट पर किया है जिसे गूगल पर सर्च किया जा सकता है| 

मैं अल्पज्ञ एक बार पुनः आपसे सरकारी निर्देशों का दृढ़ता और धैर्य के साथ पालन करने का निवेदन करते हुए उस "ज्योतिषीय रहस्य" को जगजाहिर करने का प्रयास करता हूँ कि आखिर क्यों मैंने कोरोना के नाश होने के लिए 14 अप्रैल की तारीख लिखी थी, जिसके कुछ अंशों का उल्लेख पूर्व लेख में किया जा चुका है| लेकिन अब👉 मैं कोरोना के अंत हेतु यहाँ कुछ और अंशों का रहस्य बताता हूँ👉आज देश-दुनिया में गर्मी बढ़ोत्तरी को लेकर कोरोना वायरस के नष्ट होने पर चर्चा हो रही है लेकिन हमें ज्योतिषीय गणना के तथ्यों को समझना चाहिए क्योंकि कोरोना के चलते गर्मी तो अनेक देशों और स्वदेश के अनेक प्रान्तों में आज भी मौजूद है इसलिए लेख के माध्यम से संक्षिप्त में इस गर्मी सम्बन्धी तथ्य को समझने हेतु प्रयासरत रहना चाहिए और👉ध्यान रखना चाहिए कि👉अग्नितत्व ग्रह का अग्नितत्व राशि या अग्नितत्व ग्रह का वायुतत्व जैसी मित्र राशियों में विचरण होता है तब उन ग्रहों से प्रकाशित प्रकाश, गर्मी या तरंगे पृथ्वी इत्यादि पर जीवमात्र में आरोग्यता और खुशहाली पैदा करती हैं| 

👉इसलिए सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए आज महामारी के संकट में घर पर ही रहकर 14 अप्रैल से हमें रोज सुबह उगते हुए सूर्य किरणों में बैठकर या खड़े होकर कुछ समय बिताना चाहिए|

ज्योतिषीय ब्रह्माण्ड में पिता की पदवी से विभूषित सूर्यदेव अग्नितत्व ग्रह(आदर्श तारा) माने जाते हैं और सेनापति की पदवी से विभूषित मंगलदेव भी अग्नितत्व हैं साथ ही मंगलदेव की मेषराशि भी अग्नितत्व है जिसमें सूर्यदेव 14 अप्रैल की सुबह उदित होंगे और विश्व में आरोग्यता का प्रकाश(गर्मी) फैलाने की शुरूआत कर देंगे|

 

संक्षिप्त में कहें तो इधर औषधि व सफलता प्राप्ति के कारक सूर्यदेव का आरोग्यता दायक प्रकाश "14 अप्रैल से 14 मई" तक पृथ्वी पर रहेगा जोकि "कोरोना" के लिए महाकाल साबित होगा! तो👉उधर इसी अवधि के बीच 4 मई को अग्नितत्व "मंगलदेव" पृथ्वीतत्व राशि छोड़कर अग्नितत्व ग्रह की मित्र वायुतत्व राशि कुम्भ में प्रस्थान(प्रवेश) करेंगे तो वहीं वायुतत्व शनिदेव 11 मई को वक्री होकर 29 सितम्बर को मार्गी होंगे और आकाश सूचक गुरूदेव 14 मई को पृथ्वीतत्व राशि मकर को छोड़ते हुए अपनी अग्नितत्व धनुराशि की ओर वक्री यानी उल्टी चाल से प्रस्थान करते हुए 30 जून को स्वराशि धनु में पुन: प्रवेश करेंगे|

👉कहने का तात्पर्य है कि"14 अप्रैल से 14 मई" का समय कोरोना को फाँसी देने(अंत करने) के लिए अति महत्वपूर्ण समय है! 👉अगर देश की जनता-जनार्दन का सहयोग सरकारी निर्देशों के पालन हेतु नि:स्वार्थ, निरन्तर मिलता रहा तो यह "ग्रहयोग" मेरे भरत जी के भारत में कोरोना के लिए निश्चित ही "डेथवॉरेंट" साबित होगा| जिसके सुपरिणाम जीवमात्र के लिए सुखद ही होंगे|

मैं अल्पज्ञ देश की जनता से पुन: करबद्ध निवेदन करता हूँ कि सरकार द्वारा देशहित-जनहित में जारी सभी निर्देशों का धैर्य, संयम से व गम्भीरता से पालन करें!👉साथ ही देश-दुनिया की समस्त जनता को सचेत करते हुए हाथ जोड़कर अपील करता हूँ कि👉 कृपया प्रकृति के नियमों का उल्लंघन न करें उसके वातावरण को प्रदूषित न करें और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान में सहयोगी बनें|

भारत सरकार और भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा निर्देशित मार्गों पर चलें, अभक्ष्य पदार्थों व अन्याय, अंहकार और आड़म्बर जैसे अनेकों अनैतिक मार्गों का त्याग करते हुए "मूलकर्मों-मूलधर्मों"(मुख्य कर्तव्य) के साथ अहिंसा, सदाचार का पालन करें! 👉क्योंकि इसी वर्ष एक बार फिर न्याय और दण्डाधिकारी शनिदेव वक्री होकर मार्गी गति से पृथ्वीतत्व स्वराशि मकर में ही भ्रमण(गोचर) करते रहेंगे! 

जानकारी के लिए पुन: बता दें कि शनि 22 जनवरी 2020 से आगमी ढ़ाई बर्ष तक अपनी पृथ्वीतत्व मकर राशि में ही भ्रमणशील रहेंगे, इसीलिए👉सच्चाई शाकाहार और स्वच्छता की आदत अपनाए | स्वयं स्वस्थ रहें और अपने परिवार को स्वस्थ व सुरक्षित रखें| "लेख में त्रुटियों हेतु समस्त विद्वानगणों से क्षमायाचना करता हूँ|"👉 पी.एम.जैन !मो.9718544977

👉कोरोना से लड़ने के लिए लॉकडाउन है एक "प्राणऊर्जा औषधि"

👉जहाँ के वातावरण में प्रकृति की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है वहाँ के प्रत्येक प्राणी की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है|

👉जानिए लॉकडाउन का लॉजिक-

नई दिल्ली-: विश्वव्यापी महामारी "कोरोना वायरस" के चलते देश में "लॉकडाउन" को लेकर अनेकों चर्चा गली-मौहल्ले व सोशल मीडिया के माध्यम से सुनने को मिल रही हैं|

प्राचीन समय में देश का राजा वही होता था जो राजनीति,कूटनीति, रणनीति, अर्थनीति, धर्मनीति, विज्ञान, ज्योतिष, वैैैैद्य,औषधि और प्राकृतिक ज्ञान- विज्ञान आदि जैसी अनेकानेक विद्याओं का दृश्य-अदृश्य रूप से स्व-ज्ञाता होता था और वह राजा देश में मौजूद उपरोक्त विषयों से सम्बन्धित सभी गणमान्यों के साथ मित्रभाव से सम्पर्क रखते थे|

देश में स्वच्छता अभियान जैसे अनेकों अभियान चलाने वाले हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पर हमें गर्व है कि हमारे देश को अनेक विद्याओं का ज्ञाता और धर्मनिष्ठ व धर्मनिरपेक्ष राजा मिला है!

👉जिसने "कोरोना" वायरस महामारी की विश्व में कोई दवा न होते हुए भी अपने देश की जनता को प्राणऊर्जा (थाली बजाना,दीपक जलाना) जैसी बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि प्रदान की है|👉यहाँ विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि जहाँ प्रकृति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इन्यूनिटी) अधिक होती है वहाँ के वातावरण में प्रत्येक प्राणी की "रोग प्रतिरोधक" क्षमता स्वत: ही मजबूत हो जाती है|

मेरे मतानुसार👉प्रधानमंत्री जी ने सर्वप्रथम विश्व में "कोरोना" को मिटाने के लिए दवाई(औषधि) हेतु अपनी दृष्टि दौड़ाई होगी और कोई हल न मिलने पर उन्होंने तुरन्त भारतीय ऋषि- मुनियों द्वारा निर्धारित प्राकृतिक नियमों, स्वदेशी औषधि एवं ज्योतिष विद्या को खखोला होगा और ज्योतिषीय ग्रह नक्षत्रों के समयचक्र को जानकर तत्काल प्रकृति विज्ञान के साथ स्वास्थ्य उपचार के रहस्य को समझते हुए देश में 22 मार्च रविवार(सूर्य दिन) को "जनता कर्फ्यू" की घोषणा कर दी| संक्षिप्त में कहें तो ज्योतिष विद्या के तहत वर्तमान में वायुतत्व शनि पृथ्वीतत्व राशि मकर में भ्रमणशील है और उसी मकर राशि में 22 मार्च को अग्नितत्व मंगल ग्रह का प्रवेश हुआ है! 

 👉प्रधानमंत्री की सूझबूझ और डाक्टर्स की मंत्रणा से 14 अप्रैल तक के लिए सम्पूर्ण देश को लॉकडाउन कर दिया| लॉकडाउन के कठोर निर्णय से यह विशेष लाभ होगा कि वायरस संक्रमण में तो कमी आएगी ही साथ ही साथ देश की जनता को स्वच्छ वायु भी प्राप्त होगी जोकि स्वस्थ जीवन का आधार है| 👉यहाँ ज्योतिष के तहत यह भी ध्यान रखा गया है कि अप्रैल माह में "अग्नितत्व सूर्य" तत्व के स्वभाव से अपनी विरोधी जलतत्व राशि मीन को छोड़कर अग्नितत्व राशि मेष में 14 अप्रैल को उदित होंगे और कोरोना का अंत निश्चित करेंगे|

 👉केन्द्र सरकार द्वारा देशहित-जनहित में इस छुआछूत की बीमारी से बचने के लिए परहेज हेतु कई मुख्य निर्देशों को जारी किया गया है जिन्हें हम सब को दृढता से संकल्पित होकर संयम के साथ स्वीकार करना चाहिए क्योंकि संयम से धर्म और धर्म से पुण्य की उत्पत्ति होती है और असंयमित होने पर मृत्यु या मृत्युतुल्य पाप रूपी कष्ट ही उत्पन्न होते हैं| 

👉"परहेज के बिना बीमारी से बचना और लड़ना दोनों ही असम्भव हैं" इसीलिए संक्रमण से बचाव एवं प्राणवायु(अॉक्सीजन) को प्रदूषण रहित रखने के लिए जनता जनार्दन को प्रकृति और सरकार द्वारा जनहित में जारी निर्देशों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए| प्रधानमंत्री जी द्वारा लॉकडाउन के कठोर निर्णय के बाद उन्होंने देश की जनता से असुविधा के लिए क्षमायाचना की है ! जोकि एक विनम्र और कुशल राजा की पहचान है|

👉लॉकडाउन के माध्यम से प्रधानमंत्री जी ने देश में जीवन दायिनी "प्राणवायु व प्राणऊर्जा औषधि"का वितरण सूर्य की भाँति समान रूप से बखूबी किया है! जिसके सुपरिणाम से सभी देशवासी अवगत हैं कि जहाँ वायुप्रदूषण का खतरा, खतरे के निशान से कई गुना बढ़-चढ़कर रहता था वहाँ महामारी प्रकोप के समय सामान्य है, जिसकी कोरोना से लड़ने के लिए प्रत्येक प्राणी को बहुत ही सख्त जरूरत है|

👉लॉकडाउन का सुपरिणाम समस्त भारत में देखते हुए देखिए कि राजधानी दिल्ली में प्रदूषण सामान्य से बढ़कर 200- 400- 800-1000 तक रहने वाला वायुप्रदूषण आज(3 अप्रैल) 60 के स्तर पर चला गया है साथ ही देश की उन समस्त नदियों और वृक्षों की तरफ नज़र डालें तो जल प्रदूषण और वायुप्रदूषण देखने को नहीं मिल रहा है! जोकि कोरोना के अंत के लिए निश्चित ही काल साबित होगा|

🙏एक सच्चे देशभक्त के लिए सरकार द्वारा जनहित में जारी समस्त नियमों का पालन करना ही सर्वोपरि धर्म और सच्ची देशभक्ति है| लेख में त्रुटि के लिए क्षमा🙏-पारसमणि जैन"ज्योतिष विचारक" दिल्ली!मो.9718544977

👉महाभारत के भीष्मपिता वाली बात कह रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी जी

नई दिल्ली -: ज्योतिष विद्या के अन्तर्गत अगर हम कोरोना वायरस पर संक्षिप्त में चर्चा करें तो मेरे मतानुसार-कोरोना की कमर तोड़ने लिए मंगल ग्रह सूर्यदेव का इन्तजार कर रहा है| जानकरी के लिए आपको बता दें कि 24 जनवरी 2020 को शनिग्रह अपनी स्वराशि मकर में प्रवेश कर चुका था और ज्योतिष में मकर राशि को “पृथ्वीतत्व” कहा है इधर राहूग्रह को वायरस और भ्रमित करने वाला ग्रह माना जाता है| वर्तमान में राहू अपनी उच्चराशि मिथुन में भ्रमणशील(गोचर)है और उधर राहूग्रह का धड़(शरीर) कहे जाने वाला👉केतुग्रह भी अपनी उच्चराशि धनु में ब्रह्माण्ड के सबसे बड़े ग्रह👉गुरू के साथ ही गुरू की स्वराशि धनु में भ्रमण कर रहा है|

👉शनिदेव का “पृथ्वीतत्व” स्वराशि मकर में होना और सूर्यदेव का भी 14 जनवरी(मकर संक्रान्ति) से शनि की “पृथ्वी तत्व” राशि मकर में भ्रमण करना और फिर सूर्यदेव का एक माह के लिए शनि की”वायुतत्व” राशि कुम्भ में भ्रमण करते हुए “जलतत्व”राशि मीन में 4 मार्च को प्रवेश करना अर्थात “वायुतत्व शनिग्रह” का पृथ्वीतत्व राशि में भ्रमण करना और अग्नितत्व सूर्यग्रह का जलतत्व राशि में भ्रमण करना भारत में भी “कोरोना” महामारी के प्रकोप को दर्शाता है|

लेकिन अब👉धैर्य-संयम और शाँति का परिचय देते हुए देश की जनता को ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है और कोरोना के चलते सरकार द्वारा जनहित में जारी निर्देशों का अवश्य पालन करना है👉क्योंकि अब अग्नि रूपी मंगल ग्रह 22 मार्च से शनि की “पृथ्वीतत्व” स्वराशि मकर में पहुँच चुका है और मकर राशि मंगल के लिए उच्चराशि होती है यानी उच्च का मंगल मकरराशि में भ्रमणशील है और 29-30 मार्च को आकाश सूूूचक गुरूग्रह भी केतुग्रह का साथ छोड़कर पृथ्वीतत्व मकरराशि में प्रवेश करेगा इस राशि में गुरू का नीच राशिगत भ्रमण होता है लेकिन पिता की पदवी से विभूषित- अग्नि रूपी सूर्यदेव अपनी अग्नितत्व उच्चराशि मेष में 14 अप्रैल की सुबह उदित होंगे और कोरोना की कमर तोडते हुए उसका खात्मा करना शुरू कर देंगे|

👉ज्योतिषीय गणना का आंकलन करें तो सूर्यदेव 13 अप्रैल से 14 मई तक मंगलदेव 22 मार्च से 4 मई तक अपनी उच्चराशियों में ही भ्रमणशील रहेंगे और गुरूदेव मकरराशि से 14 मई को वक्रीगति से चलते हुए 30 जून को अपनी स्वराशि धनु में पुन: प्रवेश करेंगे|

सूर्य+मंगल+गुरू आपस में मित्र ग्रह हैं और पिता कहे जाने वाले सूर्य में समस्त ग्रहों को अस्त-पूर्णास्त करने की पूर्ण क्षमता मौजूद होती है साथ ही सभी ग्रह सूर्यदेव की  परक्रमा भी करते हैं👉अब मंगलदेव को इन्तजार है तो सिर्फ अपनी “अग्नितत्व” स्वराशि मेष में सूर्यदेव के आने का है जोकि सूर्यदेव 13 अप्रैल सायं के 8 बजकर 23 मिनट पर अपनी उच्चराशि मेष में प्रवेश करेंगे और हमारे भारत में 14 अप्रैल की सुुुबह से कोरोना का खात्मा शुरू होगा लेेेेकिन 👉ध्यान रखना महाभारत से भी बड़़े इस विश्व युुुुद्ध में विशेष रूप से देश की जनता का सहयोग अत्यन्त आवश्यक है!

👉महाभारत के रण में प्रहार को लेकर दुर्योधन का उतावलापन देखते हुए भीष्मपिता ने कहा था कि” प्रहार के लिए समय का इन्तजार करो वत्स!और धैर्य रखना सीखो|”👉आज वही बात हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी जनता से कह रहे हैं जिनकी राशि वृश्चिक और राशि स्वामी मंगल ही है! वहीं देश के गृहमंत्री अमित शाह की राशि भी मेष है जिसका राशि स्वामी भी मंगल है लेकिन👉 देश की राशि धनु है इसलिए देश की जनता को भ्रमित नहीं होना चाहिए मोदी जी द्वारा कही हुई बातों को दृढ़ता से मानें!

🙏सरकार के निर्देशों का अनुसरण करना देशधर्म-देशभक्ति ही है जिसे हम सर्वोपरि धर्म कहते हैं|

उपाय👉संक्षिप्त के तहत, मै यही कहूँगा कि शनिदेव को न्याय और दण्डाधिकारी कहा है और अब 24 जनवरी 2020 से शनिदेव “पृथ्वीतत्व राशि” मकर में ही ढ़ाई वर्ष तक भ्रमण करेंगे जिसके चलते प्रत्येक व्यक्ति को आडम्बर, अहंकार इत्यादि जैसे अनेकों अनैतिक मार्गों और अमर्यादित व अभक्ष्य पदार्थों का त्याग करते हुए भारतीय ऋषि-मुनियों द्वारा निर्देशित मार्गों पर चलना चाहिए और अपने मूलधर्मों का दृड़ता से पालन करना चाहिए|🙏” शनिदेव के दीर्घ उपाय हेतु आगामी लेख का इन्तजार करें🙏|”

👉मित्रों मैं अल्पज्ञ, इसीलिए कहता हूँ कि “ग्रहचक्र ही समय चक्र है! दीर्घकालीन सुखद जीवन के लिए दिनचर्या में परिवर्तन करो जीवन परिवर्तित हो जायेगा”!!🙏अगर हम सब देशवासियों ने सरकार द्वारा देशहित-जनहित में जारी समस्त निर्देशों का पालन दृढ़ता से किया तो भारत “कोरोना को कब्र में निश्चित दफ़ना देगा|लेख में त्रुटि आदि के लिए क्षमायाचन- पी.एम.जैन”ज्योतिष विचारक” दिल्ली मो.9718544977

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