दिगम्बर जैन मुनिराजों की प्रवचन श्रँखला
दिगम्बर मुनिराजों की प्रवचन श्रँखला
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनिराज, मुनि श्री वीर सागर जी , मुनि श्री विशाल सागर जी , मुनि श्री धवल सागर जी महाराज की प्रवचन श्रँखला में मुनि श्री धवल सागर जी महाराज ने कहा कि अगर कोई दिगंबर मुनि शास्त्रों में वर्णित मूलगुणों का पालन नही करता तो वह नरक का भोगी होगा। मात्र दिगम्बर होने से ही कोई मुनि नहीं होता है । उन्होंने कहा कि भाव लिंगी होना परम आवश्यक है। ज्ञान चाहे उस मुनि में कम हो, मगर चारित्र को पालन करने वाला जरूर होना चाहिए, तभी वह पूजनीय होगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई साधु संत अपने मार्ग से भटका हुआ लगे तो एकाँत में उन्हें अपनी बात समझाओं और फिर भी न समझे तो आप उनसे दूर हो जाओ।
मुनि श्री विशाल सागर जी महाराज ने कहा कि आप सच्चे देव, शास्त्र,गुरु की अराधना करें। ढोंगी साधु संतों के बहकावे में मत आयें। किसी को गुरु बनाने से पहले अच्छे से जान लो, समझ लो, फिर तुम्हारा मन कहे तो गुरु स्वीकार करो।
मुनि श्री वीर सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म मंदिर से नहीं घर से शुरू होता है। आप कहीं पर भी रहकर धर्म कर सकते हो, चाहे वह सफर हो, चाहे अॉफिस हो, चाहे दुकान हो या कोई ओर जगह। धर्म करने में कुछ भी नहीं लगता। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही सरल काम है। अपने हृदय में विनय के भाव लाये। धर्म पल जायेगा। उन्होंने कहा कि आप नियम बनाएं महीने में एक बार किसी हॉस्पिटल में जाये। दुखी रोगियों को देखें, आपका हृदय जरूर पिघलेगा। आपके मन में अवश्य ही दया के भाव जागृत होंगे। उन्होंने कहा कि आज तक आपने केवल अपनों के लिए आँसू बहाए है। आज से आप दूसरों के लिए आँसू बहाना शुरू करेंगे। धर्म स्वयं पल जायेगा।




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