महापितर दोष
पुराने मन्दिरों की सेवा अर्थात देखरेख न करना ही सर्व मानव समाज के लिऐ सबसे बड़ा पितरदोष है क्योंकि हमारे पूर्वजों ने स्वयं के और हमारे हित के लिए ही मन्दिरों का निर्माण कराया था लेकिन आज वह मन्दिर वृद्ध अवस्था में सिसक रहे हैं|आज हमारे पितर अर्थात पूर्वज जहाँ कहीं जिस योनि में होगे वहाँ पर भी मन्दिरों की अविनय का दंड स्वयं भोग रहे होगें क्योंकि मन्दिर रूपी वृक्ष उन्हीं पितरों की देन है|
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